प्राणी से मेरे अनोखा रिश्ता एक अनूठा अहसास मेरे दिल को भाव- विभोर करने लगा था। प्राणी से मेरे अनोखा रिश्ता एक अनूठा अहसास मेरे दिल को भाव- विभोर करने लगा था।
परवरिश में तो कहीं कोई कमी नहीं रह गई। असमंजस की स्थिति बनी है जीवन की। परवरिश में तो कहीं कोई कमी नहीं रह गई। असमंजस की स्थिति बनी है जीवन की।
गर सुबह को भुला शाम को घर लौट आये तो गंवाया कुछ भी नहीं बस पाया है। गर सुबह को भुला शाम को घर लौट आये तो गंवाया कुछ भी नहीं बस पाया है।
जिनको घर में काम नहीं है वो लोग बालकनी में दिन भर डटे रहते हैं। जिनको घर में काम नहीं है वो लोग बालकनी में दिन भर डटे रहते हैं।
तब चंचल धीरे से यही डायलॉग मार देती है " गूंगी बहू ले आते बोलती ही नहीं।" तब चंचल धीरे से यही डायलॉग मार देती है " गूंगी बहू ले आते बोलती ही नहीं।"
लोगों में अच्छाई खोजने का प्रयास करें ना की किसी की कमी निकाले ! लोगों में अच्छाई खोजने का प्रयास करें ना की किसी की कमी निकाले !